300 करोड़ के रियल एस्टेट घोटाले में लालू परिवार के करीबी अमित कात्याल को ईडी ने किया गिरफ्तार

300 करोड़ के रियल एस्टेट घोटाले में लालू परिवार के करीबी अमित कात्याल को ईडी ने किया गिरफ्तार

300 करोड़ के रियल एस्टेट घोटाले में लालू परिवार के करीबी अमित कात्याल को ईडी ने किया गिरफ्तार
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Nov 19, 2025, 3:00:00 PM

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद जहाँ राजनीतिक सरगर्मी अभी शांत भी नहीं हुई थी, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लिए एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बेहद करीबी माने जाने वाले अमित कात्याल को गिरफ्तार कर लिया है।

ईडी ने कात्याल को 300 करोड़ रुपये से अधिक के रियल एस्टेट घोटाले से जुड़े मामले में PMLA एक्ट के तहत हिरासत में लिया है।

लालू परिवार के 'विश्वस्त' पर बड़ी कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, अमित कात्याल वर्षों से लालू प्रसाद और उनके बेटे तेजस्वी यादव के करीबी रहे हैं। यहां तक कि दिल्ली स्थित वह कोठी, जहां तेजस्वी अक्सर ठहरते हैं, उसका संबंध भी कात्याल से जुड़ा बताया जाता है। कहा जाता है कि उस कोठी के संचालन और कई गतिविधियों में उनकी सीधी भूमिका रहती थी।

यह पहला मामला नहीं है — कात्याल पहले भी आर्थिक अपराधों में गिरफ्तार हो चुके हैं।

रियल एस्टेट कंपनी के जरिए हुआ बड़ा फर्जीवाड़ा

अमित कात्याल M/s Angle Infrastructure Pvt. Ltd. के निदेशक और प्रमोटर हैं। इस कंपनी पर पहले भी धोखाधड़ी और छल करने के गंभीर आरोप लगे थे।

इस बार जिस केस में गिरफ्तारी हुई है, वह दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज किया गया था, जिसे आगे चलकर ईडी ने टेकओवर कर लिया।

एजेंसी के मुताबिक, रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं कर कात्याल और उनके साथियों ने करोड़ों रुपये जुटाए, जिसे बाद में अलग-अलग कंपनियों और खातों में घुमाकर मनी लॉन्ड्रिंग की गई।

Krrish Florence Estate प्रोजेक्ट बना विवाद का केंद्र

जांच में पता चला है कि गुरुग्राम, सेक्टर-70 में स्थित Krrish Florence Estate प्रोजेक्ट में कात्याल पर भारी-भरकम रकम लेने के बावजूद फ्लैट न देने का आरोप है। यह परियोजना मुख्य रूप से सरकारी कर्मचारियों के लिए थी, लेकिन लाइसेंस मिलने से पहले ही बुकिंग के नाम पर करोड़ों रुपये वसूले गए, खरीदारों को निर्माण की गलत जानकारी दी गई, और एक दूसरे डेवलपर से लाइसेंस लेने के नाम पर भी धोखाधड़ी की गई।

जांच में यह भी सामने आया कि किए गए फर्जीवाड़े की रकम को कई खातों में घुमाकर सफेद करने की कोशिश हुई। यही वजह है कि ईडी ने इस मामले को गंभीर मनी लॉन्ड्रिंग अपराध मानते हुए गिरफ्तारी की है।