ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध के असर अब आम लोगों की जेब पर भी साफ दिखाई देने लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कीमतों में उछाल के कारण प्लास्टिक उद्योग पर सीधा प्रभाव पड़ा है। इसका नतीजा यह है कि प्लास्टिक से बनने वाले रोजमर्रा के सामान अब महंगे होने लगे हैं।
व्यापारियों के अनुसार, एक अप्रैल से प्लास्टिक उत्पादों के दाम बढ़ने जा रहे हैं। दुकानदारों को कंपनियों की ओर से पहले ही इसकी सूचना दे दी गई है। प्लास्टिक बाल्टी, मग, डस्टबिन जैसे घरेलू सामानों के दाम में करीब 10 फीसदी तक वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है।
जीटी रोड स्थित भारत कॉर्नर के संचालक बताते हैं कि प्लास्टिक के कच्चे माल यानी दाने की कीमत में भारी बढ़ोतरी हुई है। उनका कहना है कि युद्ध के दौरान अब तक प्लास्टिक का रेट 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुका है। पहले का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है और उत्पादन में भी कमी आई है, जिसका असर अब बाजार में साफ दिखने लगा है।
व्यापारियों का कहना है कि प्लास्टिक उत्पादों की कीमतों में 30 से 50 फीसदी तक बढ़ोतरी हो चुकी है। उदाहरण के तौर पर, जो पाइप पहले 400 रुपए में बिकता था, अब उसकी कीमत बढ़कर 520 रुपए हो गई है। बढ़ती कीमतों के कारण ग्राहकों की संख्या में भी कमी आई है, जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है।
वहीं, किराना व्यवसायी सूरज जायसवाल बताते हैं कि सिर्फ प्लास्टिक ही नहीं, बल्कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी तेजी आई है। रिफाइंड तेल, जो पहले 2100 रुपए प्रति टीन था, अब 2400 से 2500 रुपए तक पहुंच गया है। वहीं, प्रति किलो रिफाइंड का दाम 120 रुपए से बढ़कर 140 रुपए हो गया है।
कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव का सीधा असर स्थानीय बाजारों पर पड़ रहा है और महंगाई का दबाव आम जनता पर लगातार बढ़ता जा रहा है। आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते