अब सड़कों पर पुरानी और जर्जर स्कूली बसें नहीं दौड़ेंगी। इन बसों से बच्चों को लाने-ले जाने की अनुमति नहीं मिलेगी। शिक्षा विभाग ने जिला परिवहन विभाग के साथ मिलकर खटारा बसों पर रोक लगाने का फैसला लिया है। अभियान चलाकर सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करने वाली बसों को जब्त किया जाएगा। अब नई या दो-तीन साल पुरानी स्कूली बसें ही चलेंगी। बसों में सुरक्षा मानक की अनदेखी करने वाले स्कूल प्रबंधकों पर कार्रवाई की जाएगी।
जिला शिक्षा कार्यालय ने सभी स्कूल प्रबंधकों को इसकी जानकारी दे दी है। जिला शिक्षा कार्यालय के अनुसार, स्कूलों को निर्देशित किया जाएगा कि वे बसों में सुरक्षा मानकों का पालन कराना सुनिश्चित करें। बसों और कैब में भी सीट से अधिक बच्चों को बैठाने पर कार्रवाई की जाएगी।
जिला शिक्षा कार्यालय के मुताबिक, पटना जिले में निजी स्कूल करीब 1,300 बसें और 2500 छोटे वैन चलाते हैं। लेकिन, परिवहन विभाग से 234 बसें और 143 वैन ही रजिस्टर्ड हैं। जिन स्कूल प्रबंधकों के बसों के डॉक्यूमेंट में कमी पाई जाएगी, उनपर कार्रवाई होगी।
स्कूल बसों और वैन में कैमरा, जीपीआरएस ट्रैकर, फायर सेफ्टी उपकरण और मेडिकल किट का होना जरूरी है। इसके अलावा वाहनों की फिटनेस सर्टिफिकेट, प्रदूषण वैधता प्रमाणपत्र, व्हीकल ड्राइविंग लाइसेंस, खिड़की में लोहे के तीन रॉड लेग, सीट बेल्ट, बस के पीछे स्कूल के नाम और नंबर लिखे होने चाहिए। साथ ही ड्राइवरों का पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी है। ड्राइवर और खलासी का नाम और नंबर भी बस भी लिखा होना चाहिए। स्कूल वैन पर पीली पट्टी पर स्कूल का नाम लिखा होना चाहिए। वाहनों की रफ्तार अधिकतम 40 किमी प्रति घंटा से अधिक नहीं होनी चाहिए।