गैस किल्लत से बढ़ी परेशानी: कई राज्यों में कॉमर्शियल सिलेंडर बंद, गोपालगंज समेत 6 जिलों में घरेलू गैस के लिए लंबी लाइन

केंद्र सरकार ने देशभर में 'एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955' लागू कर दिया है। हॉर्मुज जलमार्ग के रास्ते होने वाली गैस सप्लाई ठप होने के बाद सरकार ने ये कदम उठाया है।

गैस किल्लत से बढ़ी परेशानी: कई राज्यों में कॉमर्शियल सिलेंडर बंद, गोपालगंज समेत 6 जिलों में घरेलू गैस के लिए लंबी लाइन
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Mar 10, 2026, 5:20:00 PM

देशभर में गैस की संभावित किल्लत को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पूरे देश में एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 लागू कर दिया है। यह फैसला उस समय लिया गया है जब हॉर्मुज जलमार्ग के रास्ते होने वाली गैस सप्लाई प्रभावित होने की खबर सामने आई है। माना जा रहा है कि इस वजह से देश में गैस की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है, इसलिए सरकार ने पहले से ही एहतियाती कदम उठाए हैं।

गैस की कमी की आशंका के बीच कई राज्यों ने फिलहाल कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई पर रोक लगा दी है। बिहार, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में यह रोक लागू की गई है। इसका सबसे ज्यादा असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे फूड कारोबारियों पर पड़ रहा है। कई जगहों पर रेस्टोरेंट और होटल संचालकों का कहना है कि अगर जल्द ही गैस की सप्लाई बहाल नहीं हुई तो उन्हें अपने कारोबार बंद करने पड़ सकते हैं।

बिहार में भी कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की बुकिंग फिलहाल बंद हो गई है। गैस एजेंसियों का कहना है कि पिछले तीन दिनों से कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई नहीं आई है। एजेंसियों के पास जो पुराने सिलेंडर बचे हुए हैं, वही फिलहाल बाजार में उपलब्ध हैं। नए सिलेंडर नहीं आने की वजह से व्यापारियों और रेस्टोरेंट मालिकों की चिंता बढ़ गई है।

इधर कॉमर्शियल गैस की कमी की खबर सामने आने के बाद घरेलू उपभोक्ताओं में भी घबराहट देखने को मिल रही है। कई जगहों पर लोग पहले से ही गैस सिलेंडर बुक करने लगे हैं। इसे लेकर कई जिलों में एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें भी देखने को मिल रही हैं। गोपालगंज, आरा, दरभंगा, अररिया, बेतिया, पूर्णिया और सुपौल जैसे शहरों में लोगों की भीड़ गैस एजेंसियों के बाहर लगी रही।

दरअसल, एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 एक ऐसा कानून है जो सरकार को जरूरी वस्तुओं की सप्लाई और कीमतों को नियंत्रित करने की शक्ति देता है। इसके तहत अनाज, दाल, खाने का तेल, दवाइयों और ईंधन जैसी जरूरी चीजों पर सरकार नियंत्रण कर सकती है।

आसान शब्दों में समझें तो इसे जमाखोरी रोकने वाला कानून कहा जाता है। जब किसी जरूरी चीज की कमी होने लगती है या उसकी कीमतें अचानक बहुत ज्यादा बढ़ने लगती हैं, तब सरकार इस कानून को लागू करती है। इसके तहत व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की एक सीमा तय कर दी जाती है, जिससे कोई भी व्यापारी जरूरत से ज्यादा सामान जमा करके बाजार में कृत्रिम कमी न पैदा कर सके।

सरकार का कहना है कि यह कदम आम लोगों को राहत देने और बाजार में गैस की सप्लाई को संतुलित बनाए रखने के लिए उठाया गया है।