बिहार की राजधानी पटना में पुलिस ने सरकारी दवाइयों की अवैध जमाखोरी और सप्लाई से जुड़े एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। शहर के एक किराए के गोदाम पर की गई छापेमारी में बड़ी मात्रा में दवाइयों की बरामदगी के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। कार्रवाई के दौरान लगभग 5 हजार कफ सिरप की बोतलों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की एंटीबायोटिक और अन्य सरकारी दवाइयां जब्त की गईं। इन दवाओं की कीमत करीब 50 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये के बीच आंकी जा रही है, जिससे स्पष्ट होता है कि यह गतिविधि बड़े पैमाने पर संचालित की जा रही थी।
जांच में यह सामने आया है कि इस अवैध कारोबार के पीछे जयंत कुमार और नीरज कुमार नामक दो लोगों की संलिप्तता बताई जा रही है। दोनों ने मिलकर गोदाम किराए पर लिया था, जहां से दवाइयों का भंडारण और वितरण किया जा रहा था। पुलिस ने मौके से जयंत कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि नीरज कुमार अभी फरार है और उसकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों ने आशंका जताई है कि बरामद कफ सिरप और अन्य दवाओं का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों में भी किया जा सकता था। इसी कारण आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। ऐसे में इस मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर यह कि इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी दवाइयां बाहर कैसे पहुंचीं। साथ ही, पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं इसमें किसी सरकारी कर्मचारी की भूमिका तो नहीं है, क्योंकि बिना अंदरूनी सहयोग के इतनी बड़ी खेप का बाहर निकलना आसान नहीं माना जाता।
फिलहाल जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के पूरे तंत्र को खंगालने में जुटी हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि दवाइयों की सप्लाई किन-किन स्थानों पर की जानी थी और इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।