सरकार और राजस्व अधिकारियों के मनमाने रवैये पर पटना हाईकोर्ट ने लगाईं फटकार, जारी किया निर्देश

पटना हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और राजस्व अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा है कि प्रशासन न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करते हुए निरंकुश तरीके से कार्य नहीं कर सकता।

सरकार और राजस्व अधिकारियों के मनमाने रवैये पर पटना हाईकोर्ट ने लगाईं फटकार, जारी किया निर्देश
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Amit Kumar
: Jun 26, 2026, 6:26:00 PM

पटना हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और राजस्व अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा है कि प्रशासन न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करते हुए निरंकुश तरीके से कार्य नहीं कर सकता। कोर्ट ने जमुई जिले के खैरा अंचल के अंचलाधिकारी को याचिकाकर्ता कृष्ण कुमार गोयनका को तत्काल प्रभाव से लगान रसीद जारी करने का निर्देश दिया।

न्यायाधीश सौरेंद्र पांडेय की एकलपीठ ने कृष्ण कुमार गोयनका द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उनके नाम से पिछले लगभग 60 वर्षों से नियमित रूप से लगान रसीद निर्गत की जा रही थी, लेकिन राजस्व अधिकारियों ने अचानक रसीद जारी करना बंद कर दिया।

याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रशासन ने पूर्व में हाई कोर्ट द्वारा पारित आदेशों को निष्प्रभावी करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया। कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता के भाइयों से संबंधित मामलों में हाई कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वर्षों से चली आ रही जमाबंदी को संक्षिप्त प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से रद नहीं किया जा सकता। 

यदि राज्य को किसी जमाबंदी पर आपत्ति है तो उसे सक्षम सिविल न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि याचिका लंबित रहने के बावजूद राजस्व अधिकारियों ने संबंधित जमाबंदी को रद करने के लिए पृथक वाद प्रारंभ कर दिया। इस पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि कार्यपालिका न्यायालय की भूमिका नहीं निभा सकती और न ही लंबित न्यायिक विवाद पर स्वयं निर्णय ले सकती है।

अदालत ने अतिरिक्त समाहर्ता द्वारा प्रारंभ किए गए रदकरण वाद संख्या-39/2023 को विधिसम्मत नहीं मानते हुए उसकी आलोचना की। याचिका स्वीकार करते हुए कोर्ट ने प्रशासन को तत्काल लगान रसीद जारी करने का निर्देश दिया तथा चेतावनी दी कि सक्षम सिविल न्यायालय की प्रक्रिया को दरकिनार कर की गई किसी भी कार्रवाई को न्यायालय की अवमानना के रूप में देखा जा सकता है।

अनूप नारायण सिंह