अब नहीं बजेगा कानफोड़ू हॉर्न, ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ बिहार में राज्यव्यापी चेकिंग ड्राइव की तैयारी

अब नहीं बजेगा कानफोड़ू हॉर्न, ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ बिहार में राज्यव्यापी चेकिंग ड्राइव की तैयारी

अब नहीं बजेगा कानफोड़ू हॉर्न, ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ बिहार में राज्यव्यापी चेकिंग ड्राइव की तैयारी
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jun 13, 2026, 5:25:00 PM

बिहार सरकार ने सड़कों पर बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बड़े स्तर पर अभियान शुरू करने का फैसला किया है। परिवहन विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि निर्धारित मानकों से अधिक शोर पैदा करने वाले प्रेशर और मल्टी-टोन हॉर्न के खिलाफ राज्यव्यापी कार्रवाई की जाएगी। इस अभियान का दायरा केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऐसे उपकरणों की बिक्री करने वाले कारोबारियों को भी जांच के घेरे में लाया जाएगा।

परिवहन विभाग के अनुसार, राज्यभर में संयुक्त जांच अभियान चलाया जाएगा, जिसमें परिवहन विभाग और पुलिस की टीमें मिलकर काम करेंगी। अधिकारियों को उन दुकानों, ऑटो पार्ट्स बाजारों और वाहन शोरूमों की पहचान करने का निर्देश दिया गया है, जहां प्रतिबंधित हॉर्नों की बिक्री की जाती है। जांच के दौरान पाए जाने वाले अवैध हॉर्न जब्त किए जाएंगे और संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसन ने सभी जिलों के परिवहन अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जांच अभियान व्यापक और निष्पक्ष होना चाहिए। इसके तहत निजी वाहनों के साथ-साथ स्कूली बसों, वाणिज्यिक वाहनों और सरकारी उपयोग में आने वाली गाड़ियों की भी जांच की जाएगी। नगर निकायों को भी यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके अधीन संचालित किसी भी वाहन में नियमों के विपरीत हॉर्न का उपयोग न हो।

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 190(2) के तहत निर्धारित सीमा से अधिक ध्वनि उत्पन्न करने वाले हॉर्न का उपयोग दंडनीय माना गया है। इसी कानूनी प्रावधान के आधार पर विभाग उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करेगा। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन को विशेष फ्लाइंग स्क्वाड गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। ये टीमें विभिन्न स्थानों पर अचानक निरीक्षण कर नियम तोड़ने वालों पर तत्काल जुर्माना और अन्य आवश्यक कार्रवाई करेंगी।

परिवहन सचिव राज कुमार ने कहा कि अत्यधिक शोर करने वाले हॉर्न सार्वजनिक जीवन और सड़क सुरक्षा दोनों के लिए चुनौती बन चुके हैं। अचानक तेज आवाज के कारण वाहन चालक और पैदल यात्री विचलित हो सकते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और आवासीय क्षेत्रों जैसे संवेदनशील इलाकों में ऐसे हॉर्न लोगों की परेशानी का कारण बनते हैं।

विभाग ने नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षित और शांत यातायात व्यवस्था के लिए वाहन मालिकों को स्वेच्छा से ऐसे हॉर्न हटाने चाहिए जो निर्धारित मानकों का उल्लंघन करते हैं। सरकार का मानना है कि प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ जनसहभागिता से ही ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।