भरत तिवारी एनकाउंटर, रोहिणी ने उठाये सवाल, सरकार पर साधा निशाना
भोजपुर के बिलौटी में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एक तरफ जहां महकमें और राज्य सरकार को लेकर पक्ष विपक्ष के नेता लगाताद अपने सवाल दाग रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य की भी इंट्री हो गयी। लालू प्रसाद की पुत्री रोहिणी आचार्य ने इस पूरी घटना पर सवाल उठाया है। रोहिणी ने पूछा है कि भरत तिवारी की पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गयी है? बता दें कि रोहिणी आचार्य ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से इस सवाल को उठाया है।
रोहिणी ने लिखा है कि भरत तिवारी फर्जी मुठभेड़ मामले में सरकार के गठित न्यायिक जाँच से त्वरित कुछ स्पष्ट व् उजागर नहीं होने वाला है, न्यायिक जाँच की प्रक्रिया लंबी चलने की संभावना है और इस वजह से इस जघन्य हत्याकांड के दोषियों का दोष साबित होने में काफी वक्त भी लगने वाला है। मेरी राय में न्यायिक जाँच का ये आदेश जनाक्रोश को ठंडा करने की सरकार की एक कवायद का हिस्सा है। दलितों, वंचितों, शोषितों, पिछड़ों - हाशिए पर खड़ी आबादी के अधिकारों , उनकी सहूलियतों , उनकी समस्याओं के निवारण एवं समाधान के लिए संघर्ष करते हुए अपनी जान गंवाने वाले भरत तिवारी के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए जमीन पर गंभीरता से संघर्ष कर रहे , आवाज उठा रहे लोगों के साथ - साथ सरकार से मेरा भी ये सीधा सवाल है कि भरत तिवारी की पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट कहाँ है ? क्यों अब तक सार्वजनिक नहीं की गयी है पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट ? पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में की जा रही देरी की आड़ में किसे बचाना चाह रही है हत्यारी सम्राट सरकार व् पुलिस ? मामले से जुड़ीं कई याचिकाएं कई माननीय न्यायालयों / अदालतों में दायर हैं और याचिकाओं की कानूनी मजबूती के लिए पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट का होना निहायत ही जरूरी है।
रोहिणी ने कहा है कि फर्जी मुठभेड़ में किस - किस की संलिप्तता है, इसे उजागर करने के लिए भरत तिवारी के परिजन मृतक के मोबाइल फोन के डिटेल्स को भी सार्वजनिक किए जाने की मांग कर रहे हैं , मृतक का मोबाइल फ़ोन पुलिस के कब्जे में है , मगर इस बारे में सम्राट सरकार की पुलिस ने चुप्पी साध रखी है , परिजनों का स्पष्ट कहना है कि मोबाइल फ़ोन में फर्जी मुठभेड़ का आदेश देने वाले असली व् बड़े गुनाहगारों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य - सबूत व् जानकारियाँ हैं . ऐसे में सहज ही सवाल उठता है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि अपनी काली करतूत पर पर्दा डालने के मकसद से पुलिस द्वारा मोबाइल फोन , मोबाइल में मौजूद डेटा और व्हाट'स एप्प चैट को नष्ट कर दिया गया है। ज्ञात हो कि विभिन्न मुद्दों पर रोहिणी आचार्य पहले भी राज्य सरकार पर निशाना साधते रही हैं। अब भरत तिवारी मामले पर भी उन्होंने सरकार को कटघरे में खडा कर दिया है।