23 जनवरी यानी आज बसंत पंचमी का पर्व पूरे देश में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. यह दिन मां सरस्वती को समर्पित होता है, जिन्हें विद्या, बुद्धि और वाणी की देवी माना जाता है. इस दिन लोग ज्ञान, शिक्षा और कला में सफलता की कामना से मां सरस्वती की पूजा करते हैं. खासतौर पर छात्रों, शिक्षकों और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
इसी दिन से ऋतुओं में बदलाव शुरू होता है और बसंत ऋतु का आगमन होता है. यही कारण है कि यह दिन पीले रंग की खुशी, ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की सच्चे मन से पूजा करने से पढ़ाई में मन लगता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं.
बसंत पंचमी के दिन पूजा के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना जाता है. सूर्योदय के बाद से दोपहर तक मां सरस्वती की आराधना करना शुभ फल देता है. इस दौरान मन शांत रहता है और पूजा का पूरा लाभ मिलता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी की तिथि आज अर्धरात्रि में 2 बजकर 28 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 24 जनवरी, शनिवार की रात 1 बजकर 46 मिनट पर होगा. बसंत पंचमी पर आज सरस्वती माता का पूजन मुहूर्त सुबह 7 बजकर 13 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा.
बसंत पंचमी को खास दिन माना जाता है, क्योंकि इसे अबूझ मुहूर्त का दर्जा दिया गया है. इसका अर्थ है कि इस दिन शादी, गृह प्रवेश, नया वाहन लेने, प्रॉपर्टी से जुड़े काम या किसी नए कार्य की शुरुआत के लिए अलग से शुभ समय देखने की जरूरत नहीं होती. लोग इस दिन बिना किसी चिंता के नए काम शुरू कर सकते हैं.
बसंत पंचमी के दिन पूजा से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें. इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है, इसलिए संभव हो तो पीले वस्त्र धारण करें. घर के मंदिर या साफ स्थान पर मां सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर रखें. उन्हें पीले फूल, अक्षत, हल्दी और मीठा अर्पित करें. इसके बाद मां सरस्वती का ध्यान करते हुए मंत्रों का जाप करें. पूजा के समय किताबें, कॉपी, वाद्य यंत्र या पढ़ाई से जुड़ी चीजें मां के पास रखी जा सकती हैं. इससे ज्ञान और एकाग्रता बढ़ती है. अंत में मां से बुद्धि, विवेक और सफलता का आशीर्वाद मांगें.