डर बहुत था… लेकिन हिम्मत उससे भी बड़ी निकली। जब भी सुमित कुमार आंखें बंद करता, उसके सामने अपने बड़े भाई का चेहरा आ जाता। वही चेहरा उसकी ताकत बन गया। उसने तय कर लिया कि चाहे जो हो जाए, उसे अपने भाई को बचाना है। और इसी जज़्बे के साथ सुमित ने अपने लिवर का हिस्सा दान कर दिया।
पटना के रूबन मेमोरियल हॉस्पिटल में एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जब बिहार का पहला सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट किया गया। यह सिर्फ एक मेडिकल अचीवमेंट नहीं, बल्कि भाई के प्यार और त्याग की मिसाल भी है।
31 वर्षीय मरीज की हालत बेहद गंभीर थी। उनका बिलीरुबीन स्तर 35 एमजी/डीएल तक पहुंच चुका था और शरीर में कई जटिलताएं पैदा हो गई थीं। डॉक्टरों के सामने चुनौती बड़ी थी, लेकिन समय रहते लिवर ट्रांसप्लांट का फैसला लिया गया।
करीब 9 घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी को डॉक्टर मिलिंद मंडावर और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया। हर पल जोखिम था, लेकिन टीम का अनुभव और सुमित का साहस रंग लाया।
सर्जरी के बाद चमत्कारिक सुधार देखने को मिला। मरीज तेजी से ठीक हुआ, वेंटिलेटर सपोर्ट हटाया गया और सिर्फ 14 दिनों में उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गई। वहीं, सुमित भी छह दिन बाद पूरी तरह सुरक्षित घर लौट आया।
आज यह कहानी सिर्फ एक सफल ऑपरेशन की नहीं है, बल्कि रिश्तों की गहराई, त्याग और हिम्मत की मिसाल है। सुमित ने साबित कर दिया कि सच्चा प्यार सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में दिखता है।