मॉब लिंचिंग को लेकर आक्रोश, सांसद पप्पू यादव हुए मार्च में शामिल

मॉब लिंचिंग को लेकर आक्रोश, सांसद पप्पू यादव हुए मार्च में शामिल
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Sujeet Kumar
: Jun 23, 2026, 2:04:00 PM

राजगीर के मलमास मेला के दौरान झुनकिया बाबा मंदिर के समीप हुई कथित मॉब लिंचिंग की घटना में दो दलित युवकों की मौत के बाद जनाक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। घटना के विरोध में मंगलवार को बिहारशरीफ में एक विशाल प्रतिरोध मार्च निकाला गया, जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी, कड़ी कानूनी कार्रवाई तथा पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की।

श्रम कल्याण केंद्र मैदान से शुरू हुआ आक्रोश मार्च शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए समाहरणालय पहुंचा। इस दौरान लोगों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर दलितों पर हो रहे अत्याचार और मॉब लिंचिंग की घटनाओं के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। आंदोलन में बड़ी संख्या में सामाजिक संगठनों, छात्र-युवाओं, महिलाओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। पूरे मार्च के दौरान लोगों में घटना को लेकर गहरा आक्रोश और पीड़ा देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह केवल दो व्यक्तियों की हत्या का मामला नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल है।

इस विरोध मार्च में पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव भी शामिल हुए। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी सभ्य समाज में मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कठोरतम सजा दी जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। सांसद ने कहा कि कानून को हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता, सरकारी नौकरी और सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।

समाहरणालय पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मॉब लिंचिंग की निष्पक्ष जांच, सभी आरोपियों की गिरफ्तारी, पीड़ित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा तथा अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द न्यायिक कार्रवाई नहीं हुई और उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन भी सतर्क नजर आया और विभिन्न स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

नालंदा से मिथुन की रिपोर्ट