बिहार में बड़े खेल का खुलासा हुआ है। मोतिहारी में फर्जी सर्टिफिकेट गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। जेल में बंद बालिग अपराधियों को फर्जी दस्तावेज के सहारे नाबालिग साबित करने का खेल हो रहा था। इस मामले में पुलिस ने तीन शिक्षकों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र बनाकर अपराधियों को किशोर न्याय अधिनियम का लाभ दिलाते थे।
दरअसल पूरा मामला चिरैया थाना से जुड़ा हुआ है अभियुक्त भोला कुमार उर्फ भोला साह को नाबालिग साबित करने के लिए किशोर न्याय परिषद, पूर्वी चंपारण, मोतिहारी के न्यायालय में फर्जी स्कूल सर्टिफिकेट पेश किए गए थे। दस्तावेजों पर संदेह होने के बाद परिषद ने नगर थाना में आवेदन दिया। जिसके बाद नगर थानाध्यक्ष राजीव रंजन के नेतृत्व में पुलिस ने गहन छानबीन की। जांच में सामने आया कि इस फर्जीवाड़े के पीछे तीन शिक्षकों का गिरोह काम कर रहा था।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि परेवा निवासी सरकारी शिक्षक सुबोध कुमार पाठक, शिक्षक भोला कुमार और एक सरकारी शिक्षिका ने मिलकर यह साजिश रची थी। इन तीनों ने फर्जी स्कूल प्रमाणपत्र तैयार किए। दस्तावेजों में अभियुक्त की उम्र कम दिखाकर उसे नाबालिग साबित करने की कोशिश की गई, ताकि उसे जेल की बजाय रिमांड होम भेजा जा सके। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश कर सभी दोषियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
नगर थाना के अपर थानाध्यक्ष चंदन कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने छापेमारी की। पुलिस ने तीनों आरोपी शिक्षकों को गिरफ्तार कर लिया। थानाध्यक्ष राजीव रंजन ने बताया कि गिरफ्तार शिक्षकों से पूछताछ जारी है। पुलिस ऐसे अन्य मामलों की भी समीक्षा कर रही है, जहां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों को नाबालिग दिखाकर रिमांड होम भेजा गया हो। पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है। ऐसे में मोतिहारी पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है।