गोपालगंज में 24 साल से सरकारी सिस्टम पर लटका ताला, बदहाली के आंसू बहा रहा सामुदायिक शौचालय और यात्री शेड

गोपालगंज के ​भोरे में सरकारी धन का बंदरबांट और प्रशासनिक संवेदनहीनता की एक बड़ी तस्वीर भोरे बाजार के सब्जी मंडी के समीप से सामने आई है।

गोपालगंज में 24 साल से सरकारी सिस्टम पर लटका ताला, बदहाली के आंसू बहा रहा सामुदायिक शौचालय और यात्री शेड
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Amit Kumar
: Jun 29, 2026, 12:22:00 PM

गोपालगंज के भोरे में सरकारी धन का बंदरबांट और प्रशासनिक संवेदनहीनता की एक बड़ी तस्वीर भोरे बाजार के सब्जी मंडी के समीप से सामने आई है।  यहां यात्रियों की सुविधा के लिए 24 साल पहले बनाया गया सामुदायिक शौचालय और यात्री शेड आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा  रहा है। विडंबना यह है कि निर्माण के बाद से आज तक इस शौचालय का ताला नहीं खुला, जिसके कारण लाखों की लागत से बनी यह संरचना अब जमींदोज होने की कगार पर है। 

2003 में विधायक फंड से हुआ था निर्माण

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक बताया जाता है कि वर्ष 2003 में भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन विधायक आचार्य विश्वनाथ बैठा के विधायक फंड से इस सामुदायिक शौचालय और यात्री शेड का निर्माण कराया गया था।  इसका मुख्य उद्देश्य था कि बाजार आने वाले यात्रियों और स्थानीय दुकानदारों को सुविधा मिल सके।  लेकिन ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की नाकामी के कारण 2003 में बनकर तैयार हुआ सामुदायिक शौचालय। सरकारी सिस्टम का तस्वीर बनकर रह गया लेकिन किसी ने उपयोग नहीं किया। 

सरकारी सड़क की भूमि पर ही हुआ था निर्माण

उससे भी बड़ी हैरानी की बात यह है कि विधायक फंड के बाद जिन महोदय के द्वारा इस निर्माण कार्य को कराया गया। उन्होंने इसका निर्माण कार्य भी बीच सड़क के बीचों बीच कराया था।  निर्माण के बाद से ही इस पर ताला लटका रहा।  ताज्जुब की बात यह है कि पिछले 24 सालों में दर्जनों अधिकारी आए और गए, लेकिन किसी ने भी इस बंद पड़े ताले को खुलवाने या इस भवन के रखरखाव की सुध नहीं ली। 

सरकार के लाखों खर्च लेकिन जनता को नहीं मिला लाभ

बता दे कि इन दोनों संरचना को तैयार करने के लिए सरकार के लाखों रुपए खर्च हो चुके है।  उसके बावजूद भी जनता को एक दिन भी इसका लाभ नहीं मिला।  आलम यह है की आज प्रशासनिक उदासीनता और रख-रखाव के अभाव में यात्री शेड और शौचालय की दीवारें जर्जर हो चुकी हैं। लेकिन जिम्मेवार आज भी अपने आंखों पर काली पट्टी लगाए हुए हैं। 

स्थानीय लोगों में आक्रोश

सब्जी मंडी के पास स्थित होने के कारण यहां भारी भीड़ रहती है, फिर भी शौचालय बंद होने से लोगों को काफी परेशानी होती है। 24 साल का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी इस भवन का उपयोग न होना सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।  क्या अब भी प्रशासन की नींद खुलेगी या यह सरकारी संपत्ति पूरी तरह मिट्टी में मिल जाएगी।  यह तो आने वाला समय बताएगा। 

संवाददाता, कुमार प्रदीप-गोपालगंज