भरत तिवारी एनकाउंटर में बड़ी सफलता, घटना में इस्तेमाल तीनों पिस्टल बरामद, SHO और STF जवान ने दागीं गोलियां!
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जांच के दौरान घटना में इस्तेमाल की गई तीनों पिस्टल बरामद की गई है।
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक भरत तिवारी को तीन नहीं बल्कि पांच गोलियां मारी गईं थी। वहीं यह भी खबर आ रही है कि भरत भूषण तिवारी को किस पुलिस ने गोली मारी थी। इस बीच भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जांच के दौरान घटना में इस्तेमाल की गई तीनों पिस्टल बरामद की गई है।
दरअसल भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने जांच के दौरान घटना में इस्तेमाल की गई तीनों पिस्टल बरामद की है। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर हथियार जब्त किए हैं। बरामद पिस्टलों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। पुलिस हथियारों के स्रोत और सप्लाई नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही है मामले में कई संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां घटना से जुड़े सभी पहलुओं को खंगाल रही हैं।
इससे पहले पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक भरत तिवारी को जांघ में चार गोलियां लगी, जबकि एक गोली बांयें पैर में लगी है। पहली गोली बाईं जांघ के ऊपरी अगले हिस्से में लगी। दूसरी गोली भी बाएं जांघ के मध्य भाग में भीतर की तरफ लगी पाई गई। तीसरी गोली दाईं जांघ के बीच के अंदरूनी हिस्से में लगी, जबकि चौथी गोली दाहिनी जांघ में बाहरी हिस्से से अंदर की ओर गई थी। इसके अलावा, पांचवीं गोली बाएं पैर के मध्य भाग में पीछे की तरफ से लगी थी।
मिली जानकारी के अनुसार भरत भूषण तिवारी को लगी गोलियों में एक गोली तत्कालीन एसएचओ द्वारा चलाई गई थी, जबकि चार गोलियां एसटीएफ के एक जवान द्वारा दागी गई थीं। हालांकि, इस संबंध में पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी कुल पांच राउंड फायरिंग का उल्लेख किया गया है, जिसकी जांच अभी जारी है। वहीं यह भी दावा है कि पोस्टमार्टम के दौरान शरीर से एक बुलेट भी बरामद की गई है, जिसे जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। हालांकि इन सभी दावों की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी या प्रशासनिक अधिकारी ने पुष्टि नहीं की है।
बता दें कि भरत तिवारी के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले को लेकर पिछले कई दिनों से सियासत तेज है। विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावर है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। परिजन लगातार दोषी पुलिसकर्मियों को फांसी देने और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं। सीएम सम्राट चौधरी ने भी कहा कि भोजपुर की घटना को सरकार ने गंभीरता से लिया है और न्याय सुनिश्चित करने के लिए तत्काल न्यायिक आयोग के गठन का फैसला किया गया है। वहीं सरकार की ओर से गठित न्यायिक जांच समिति के अध्यक्ष हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश विनोद सिन्हा ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस विभाग की ओर से जांच की जिम्मेदारी शाहाबाद रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) को सौंपी गई है।