सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: 2022 से पहले फ्रीज हुए भ्रूणों पर लागू नहीं होगी सरोगेसी की उम्र सीमा

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: 2022 से पहले फ्रीज हुए भ्रूणों पर लागू नहीं होगी सरोगेसी की उम्र सीमा

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: 2022 से पहले फ्रीज हुए भ्रूणों पर लागू नहीं होगी सरोगेसी की उम्र सीमा
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Oct 09, 2025, 2:05:00 PM

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि किसी महिला ने 2022 से पहले अपना भ्रूण फ्रीज कराया है, तो उस पर 2021 के सरोगेसी (नियमन) अधिनियम में निर्धारित उम्र की सीमा लागू नहीं होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मां-बाप बनने का अधिकार प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसे केवल सरकारी निर्धारित उम्र सीमा तक सीमित नहीं किया जा सकता।

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने यह निर्णय सुनाया। कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि उम्र बढ़ने के कारण प्रजनन अधिकारों पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। यह मामला जनवरी 2022 में लागू हुए सरोगेसी (नियमन) अधिनियम, 2021 से संबंधित है, जिसके तहत केवल वही दंपति सरोगेसी के लिए पात्र हैं जिनमें पुरुष की आयु 26 से 55 वर्ष और महिला की आयु 23 से 50 वर्ष के बीच हो।

चेन्नई के इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. अरुण मुथुवेल ने इस कानून के कुछ प्रावधानों के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने कमर्शियल सरोगेसी पर रोक और आयु सीमा की बाध्यता को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद चार मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट किया:

  1. कानून लागू होने से पहले फ्रीज किए गए भ्रूणों पर नई उम्र सीमा लागू नहीं होगी।

  2. यदि दंपति ने कानून से पहले भ्रूण फ्रीज कराया है, तो उन्हें सरोगेसी का अधिकार पहले से सुरक्षित रहेगा।

  3. सरोगेसी प्रक्रिया की शुरुआत उस समय से मानी जाएगी जब दंपति के स्पर्म और एग को निकालकर भ्रूण तैयार किया गया और फ्रीज कर दिया गया। इसके बाद की प्रक्रिया केवल सरोगेट मां से जुड़ी होगी।

  4. बुजुर्ग माता-पिता की परवरिश की क्षमता पर सवाल उठाना अनुचित है।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के तर्क को भी खारिज किया कि अधिक उम्र के लोग बच्चों की परवरिश नहीं कर सकते। अदालत ने कहा कि माता-पिता बनने की योग्यता निर्धारित करना सरकार का काम नहीं है। प्रजनन का अधिकार मौलिक अधिकार का हिस्सा है और यह व्यक्ति की निजता और स्वतंत्रता से जुड़ा है। उम्र संबंधी चिंताओं पर विधायिका विचार कर सकती है, लेकिन पहले से फ्रीज हुए मामलों पर इसे लागू नहीं किया जा सकता।