पटना: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महागठबंधन के आह्वान पर गुरुवार को पटना में राजभवन मार्च निकाला गया। विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख एवं बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में वीआईपी के नेता और कार्यकर्ता निकले मार्च में शामिल हुए। मार्च के दौरान पुलिस ने कई स्तरों पर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका।
राजभवन मार्च के दौरान मुकेश सहनी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में जिस तरीके से वोट काटे गए और चुनाव के दौरान पैसे बांटे जाने की शिकायतें सामने आईं, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सहनी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ऐसी परिस्थितियों में बिहार और पश्चिम बंगाल में फिर से चुनाव कराया जाना चाहिए और संविधान की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पुलिस की बैरिकेडिंग और कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए सहनी ने कहा कि जब पहले से राज्यपाल से मिलने का कार्यक्रम निर्धारित था, तो प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कई स्तरों पर बैरिकेडिंग क्यों की गई। उन्होंने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनकी उंगली में फ्रैक्चर हुआ और पैर में भी चोट आई। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर हमला बताया। मुकेश सहनी ने कहा कि विपक्ष में रहते हुए उनका दायित्व है कि वे संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और चुनाव आयोग से SIR तथा मतदाता सूची से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब मांगा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सरकार चुनती है, लेकिन आज ऐसी स्थिति बन रही है कि सरकार ही तय कर रही है कि कौन नागरिक है और कौन नहीं। सहनी ने दावा किया कि बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे पर पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। सहनी ने केंद्र सरकार पर भी राजनीतिक हमला बोला और आरोप लगाया कि देश में विपक्षी सरकारों को गिराने तथा विधायकों की खरीद-फरोख्त की राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
वीआइपी प्रमुख ने कहा कि आने वाले समय में जनता के बीच लोकतंत्र और संविधान को लेकर जागरूकता और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को अपनी जिम्मेदारी निष्पक्ष तरीके से निभानी चाहिए, तभी लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होगी।