आधी रात तक दफ्तर, रात दो बजे तक जनता दरबार, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की कार्यशैली जानकर हो जाएंगे मुरीद!

बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश कुमार तिवारी की कार्यशैली की खूब चर्चा है। उनके बारे में बताया जाता है कि वे आधी रात तक अपने कार्यालय में काम करते हैं और इसके बाद भी रात दो बजे तक अपने आवासीय कार्यालय में लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनते हैं

सियासत में पद और प्रतिष्ठा हासिल करने वाले नेताओं की कमी नहीं है, लेकिन पद मिलने के बाद भी अगर किसी नेता की दिनचर्या में आम आदमी के लिए समय बचा रहे, तो यह बात निश्चित रूप से ध्यान खींचती है। बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश कुमार तिवारी की कार्यशैली को लेकर चर्चा का एक खास पहलू यही है। उनके बारे में बताया जाता है कि वे आधी रात तक अपने कार्यालय में काम करते हैं और इसके बाद भी रात दो बजे तक अपने आवासीय कार्यालय में लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनने और समाधान की पहल करने में जुटे रहते हैं। यह कार्यशैली किसी को हैरान करती है, तो किसी के लिए जनसेवा की प्रेरणा बन जाती है।

मिथिलेश कुमार तिवारी की राजनीतिक यात्रा को समझने के लिए उनके लंबे संघर्ष और संगठन के दिनों को भी याद करना होगा। भारतीय जनता पार्टी के एक जमीनी कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाने से लेकर बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी तक पहुंचने का उनका सफर बताता है कि राजनीति में धैर्य, निरंतरता और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता की अपनी अहमियत है। उनके समर्थकों के लिए मंत्री पद तक पहुंचना केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत का परिणाम है।उनकी कार्यशैली का सबसे उल्लेखनीय पहलू लोगों से सीधा संवाद बनाए रखने की कोशिश है। उनसे मिलने के लिए कोई कार्यकर्ता, आम नागरिक या अपने क्षेत्र की समस्या लेकर पहुंचने वाला व्यक्ति आता है, तो व्यस्तता के बावजूद उसे समय देने की उनकी कोशिश चर्चा में रहती है।

लोगों की बातें सुनना, उनकी परेशानी को समझना और संबंधित स्तर पर समाधान की पहल करना—जनप्रतिनिधि की भूमिका का यही वह पक्ष है, जिससे आम जनता का भरोसा मजबूत होता है।मिथिलेश कुमार तिवारी का संपर्क केवल उनके विधानसभा क्षेत्र बैकुंठपुर तक सीमित नहीं बताया जाता। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में जिस बक्सर संसदीय क्षेत्र से उन्होंने चुनाव लड़ा था, वहां के लोगों से भी वे सीधे जुड़े रहने की कोशिश करते हैं। चुनावी राजनीति में संपर्क अक्सर मतदान के समय अधिक दिखाई देता है, लेकिन किसी नेता की असली पहचान इस बात से बनती है कि चुनाव के बाद भी वह लोगों के बीच कितना उपलब्ध रहता है।

बिहार के शिक्षा मंत्री के रूप में उनकी जिम्मेदारी और भी बड़ी है। शिक्षा ऐसा विभाग है, जिसका सीधा संबंध राज्य के करोड़ों विद्यार्थियों, शिक्षकों और परिवारों के भविष्य से है। ऐसे में उनकी कार्यशैली का वास्तविक मूल्यांकन केवल देर रात तक काम करने से नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, विद्यालयों की स्थिति, शिक्षकों की समस्याओं के समाधान और विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने जैसे परिणामों से भी होगा। लंबा कार्यसमय तभी सार्थक माना जाएगा, जब उसका सकारात्मक असर शासन और आम लोगों के जीवन में दिखाई दे।

फिलहाल, मिथिलेश कुमार तिवारी की चर्चा का केंद्र उनकी व्यस्त दिनचर्या, लोगों से मिलने की तत्परता और संगठन से जुड़े रहने की शैली है। राजनीति में जहां अक्सर नेताओं की व्यस्तता आम आदमी और उनके बीच दूरी पैदा कर देती है, वहीं जनता के लिए समय निकालने की कोशिश किसी भी जनप्रतिनिधि की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। आखिरकार, लोकतंत्र में मंत्री की असली ताकत केवल उसका पद, काफिला या सरकारी कार्यालय नहीं होता। उसकी असली ताकत वह भरोसा है, जिसके सहारे कोई साधारण नागरिक अपनी परेशानी लेकर उसके दरवाजे तक पहुंचता है। 

अगर आधी रात के बाद भी वह दरवाजा लोगों की समस्याएं सुनने के लिए खुला रहता है, तो यह कार्यशैली निश्चित रूप से चर्चा और सराहना का विषय बनती है। अब इस समर्पण की सबसे बड़ी कसौटी यही होगी कि जनता के दरबार में सुनी गई आवाजें कितनी तेजी से समाधान और व्यवस्था में सुधार तक पहुंचती हैं।

अनूप नारायण सिंह