SC में केंद्र की दलील, कहा- 'कौन रील मेकर है और कौन पत्रकार पहचानना मुश्किल'

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन और मार्च के दौरान महिला पत्रकारों पर हमले और बदसलूकी के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।

नई दिल्ली : मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन और मार्च के दौरान महिला पत्रकारों पर हमले और बदसलूकी के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आज के दौर में यह समझना मुश्किल हो गया है कि कौन पत्रकार है और कौन सिर्फ रील बनाने के लिए वीडियो रिकॉर्ड कर रहा है। सरकार ने सवाल किया कि प्रदर्शन को कवर करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स में से पत्रकारों को कैसे अलग किया जा सकता है। मोबाइल वाला कोई भी पत्रकार हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखा

सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखा। सीनियर वकील इंदिरा जयसिंह की याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें पत्रकारों के लिए सुरक्षा की मांग की गई थी। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 10 अक्टूबर और फिर उसके बाद दिल्ली की सड़कों पर जमकर विरोध प्रदर्शन हुए। सीजेपी और विपक्षी दलों के प्रदर्शनों पर आरोप लगा कि दिल्ली पुलिस ने महिला पत्रकारों पर अत्याचार किए।

CJI सूर्यकांत की नेतृत्व वाली बेंच के सामने सॉलिसिटर जनरल ने कहा- माइक के साथ कई लोग हैं

सीजेआई सूर्यकांत की नेतृत्व वाली बेंच के सामने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि माइक के साथ कई लोग हैं। वे बोलते हैं कि हम रिकॉर्डिंग कर रहे हैं और फिर इसे रील में अपलोड कर देते हैं। हमें नहीं पता कि कौन रील बनाने वाला है और कौन इंडिपेंडेंट पत्रकार है। इसके साथ ही मेहता ने यह भी कहा कि इससे सभी सहमत हैं कि किसी भी महिला, जिसमें महिला पुलिस कर्मचारी भी शामिल हैं, उनके साथ बुरा बर्ताव नहीं होना चाहिए।