झारखंड में इस वर्ष मानसून अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ सका है। मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 28 जुलाई के बीच राज्य में औसत से काफी कम वर्षा हुई है। इस अवधि में जहां सामान्य रूप से 478.3 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, वहीं वास्तविक वर्षापात केवल 352.4 मिलीमीटर दर्ज किया गया। इस तरह पूरे राज्य में अब तक करीब 26 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है।
मानसून की सबसे अधिक बेरुखी गढ़वा, चतरा, पाकुड़, देवघर, कोडरमा और गोड्डा जैसे जिलों में देखने को मिली। गढ़वा में सामान्य से 62 प्रतिशत, चतरा में 61 प्रतिशत और पाकुड़ में 60 प्रतिशत कम बारिश हुई। देवघर में वर्षा 56 प्रतिशत, कोडरमा में 52 प्रतिशत और गोड्डा में 50 प्रतिशत कम दर्ज की गई। वहीं गिरिडीह में भी सामान्य से 47 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई।
राज्य के अन्य हिस्सों में भी बारिश का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। पलामू में 41 प्रतिशत, हजारीबाग में 40 प्रतिशत, बोकारो और रामगढ़ में 36-36 प्रतिशत तथा लातेहार में 31 प्रतिशत कम वर्षापात दर्ज किया गया। इसके अलावा साहिबगंज में 12 प्रतिशत, पूर्वी सिंहभूम में 13 प्रतिशत तथा रांची और खूंटी में 17-17 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई। सिमडेगा में केवल 3 प्रतिशत और सरायकेला-खरसावां में महज 1 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।
जहां अधिकांश जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं पश्चिमी सिंहभूम राज्य का एकमात्र प्रमुख जिला रहा, जहां सामान्य से अधिक वर्षा हुई। यहां 461.9 मिलीमीटर के सामान्य आंकड़े के मुकाबले 534 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से लगभग 16 प्रतिशत अधिक है। राज्य में मानसून की कमजोर स्थिति का असर कृषि गतिविधियों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। यदि आने वाले दिनों में बारिश की रफ्तार नहीं बढ़ी, तो कई जिलों में खेती और जल संसाधनों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।