बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) में कार्यरत सेल कर्मी सुभाष चंद्र मोदी की मौत के बाद उनके परिजनों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। मौत के आठ दिन बीत जाने के बावजूद शव अब भी बोकारो जनरल अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ है। परिजन मृतक के आश्रित को स्थायी नियोजन देने की मांग पर अड़े हुए हैं और मांग पूरी होने तक अंतिम संस्कार करने से इनकार कर रहे हैं।
प्रदर्शन के तहत पिछले तीन दिनों से मृतक की पत्नी और बेटी आमरण भूख हड़ताल पर बैठी हैं। वहीं आंदोलनकारियों ने बीएसएल के प्रशासनिक भवन के मुख्य प्रवेश द्वार को भी अवरुद्ध कर दिया है, जिससे प्रबंधन पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
परिजनों का आरोप है कि सुभाष चंद्र मोदी प्लांट में ड्यूटी के दौरान घायल हुए थे। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई, लेकिन घटना के बाद भी बीएसएल प्रबंधन आश्रित को नौकरी देने के सवाल पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं ले रहा है। उनका कहना है कि जब तक नियोजन को लेकर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरना स्थल पर पहुंचे गोमिया के पूर्व विधायक लंबोदर महतो ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। उन्होंने सेल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपने ही कर्मचारी की मौत के बाद संस्था का रवैया संवेदनहीन दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस भूमि पर सेल का प्लांट स्थापित है, वह आदिवासियों की जमीन रही है, लेकिन आज उसी समुदाय के एक परिवार को उसके अधिकार से वंचित रखा जा रहा है।
पूर्व विधायक ने राज्य सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि झारखंड में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद आदिवासी परिवारों की समस्याओं के प्रति अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बीएसएल प्रबंधन शीघ्र ही मृतक के आश्रित को स्थायी नौकरी देने का निर्णय नहीं लेता, तो आजसू पार्टी इस मुद्दे को लेकर व्यापक आंदोलन छेड़ेगी।
बोकारो से चंदन सिंह की रिपोर्ट