एंडेंजर्ड एनिमल मॉनिटर लिजर्ड, जंगली बिल्ली व पैंगोलिन के भारी मात्रा में अंग बरामद, छापेमारी में 4 तस्कर गिरफ्तार

रोहतास वन प्रमंडल एवं वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की संयुक्त टीम ने सासाराम शहर के धर्मशाला मोड़ स्थित एक दुकान पर गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए मॉनिटर लिजर्ड, जंगली बिल्ली एवं पैंगोलिन के भारी मात्रा में अंग बरामद किए हैं

सासाराम : रोहतास वन प्रमंडल एवं वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) की संयुक्त टीम ने सासाराम शहर के धर्मशाला मोड़ स्थित एक दुकान पर गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए मॉनिटर लिजर्ड, जंगली बिल्ली एवं पैंगोलिन के भारी मात्रा में अंग बरामद किए हैं। इस मामले में वन विभाग की टीम ने वन्य जीव अंगों की तस्करी करने वाले चार व्यक्तियों को भी गिरफ्तार किया है, जिनके खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है।

मॉनिटर लिजर्ड, जंगली बिल्ली और पैंगोलिन के अंग बरामद 

वन प्रमंडल पदाधिकारी स्टालिन फीडल के कुमार ने बताया कि छापेमारी के दौरान मॉनिटर लिजर्ड के 15 पीस जेनिटलिया (हत्था जोड़ी) एवं पांच पीस पंजा और जंगली बिल्ली के पांच पीस फेलिस चीज (खेड़ी) बरामद हुए हैं। जबकि एक अन्य जगह पर छापेमारी के दौरान भारतीय पैंगोलिन के 10 किलोग्राम शल्क (पैंगोलिन स्केल्स) प्राप्त हुए हैं। 

क्या है अंगों की विशेषता 

मॉनिटर लिजर्ड को आम बोलचाल की भाषा में 'गोह' भी बोला जाता है। 'जेनिटलिया अथवा हत्था जोड़ी' मॉनिटर लिजर्ड का गुप्त प्रजनन अंग होता है, जिसे अंधविश्वास के कारण तांत्रिकों द्वारा जड़ी बूटी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। वहीं जंगली बिल्ली के 'खेड़ी' को भी तांत्रिक दुर्लभ एवं चमत्कारी मानते हैं, जो बच्चों के जन्म के दौरान बिल्लियों के शरीर से बाहर निकलता है। इसके अलावा पैंगोलिन अथवा वज्रशल्क भी अंधविश्वास के कारण तस्करों द्वारा शिकार किए जाते हैं। दावा किया जाता है कि इनके शल्क का पाउडर बनाकर विभिन्न प्रकार की औषधियां तैयार की जाती हैं।

4 तस्कर गिरफ्तार 

डीएफओ ने बताया कि मॉनिटर लिजर्ड एवं जंगली बिल्ली के अंग बरामदगी के दौरान एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया, वहीं भारतीय पैंगोलिन के शल्क की तस्करी करने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल सभी गिरफ्तार लोगों से बरामद सामाग्री के स्रोत और इनके अवैध परिवहन व्यापार से जुड़े नेटवर्क के संबंध में विस्तृत पूछताछ की जा रही है और प्राप्त तथ्यों के आधार पर संरक्षित वन्यजीवों के अवैध शिकार, तस्करी एवं व्यापार में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मॉनिटर लिजर्ड एवं पैंगोलिन एंडेंजर्ड स्पीशीज

मॉनिटर लिजर्ड एवं भारतीय पैंगोलिन को आईयूसीएन की रेड लिस्ट ऑफ थ्रेटेन्ड स्पीशीज में लुप्तप्राय जीवों की श्रेणी में रखा गया है। दोनों की वैश्विक आबादी में कमी का प्रमुख कारण अवैध शिकार एवं इनके अंगों का अवैध व्यापार माना जाता है। भारत में मॉनिटर लिजर्ड एवं भारतीय पैंगोलिन को वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, 1972 के अंतर्गत उच्चतम स्तर की कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। वाइल्ड लाइफ (प्रोटेक्शन) अमेंडमेंट एक्ट, 2022 के पश्चात प्रभावी अनुसूची व्यवस्था में मॉनिटर लिजर्ड को शेड्यूल-1 में क्रम संख्या 21 पर व भारतीय पैंगोलिन को शेड्यूल-1 में क्रम संख्या 113 पर सूचीबद्ध किया गया है।

वन्यजीवों की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी

डीएफओ ने आम नागरिकों से अपील किया कि वन्यजीवों के अंगों की खरीद-बिक्री अथवा अवैध व्यापार में किसी भी प्रकार से शामिल न हों। इनके अंगों से जुड़े किसी भी प्रकार के अंधविश्वास अथवा अवैज्ञानिक दावे पर विश्वास न करें। यदि किसी व्यक्ति के पास वन्यजीव अंगों के अवैध व्यापार, भंडारण व परिवहन की सूचना हो, तो तत्काल वन विभाग को सूचित करें। वन्यजीवों की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।

सासाराम से दिवाकर तिवारी की रिपोर्ट