पटना: सड़क दुर्घटनाएं राज्य के सामने एक बड़ी चुनौती हैं। दुर्घटना के बाद गोल्डेन ऑवर यानी पहले एक घंटे के भीतर घायल को अस्पताल पहुंचाकर बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकती है। इसी उद्देश्य से पीएम राहत योजना शुरू की गई है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन में अस्पतालों और पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अस्पतालों से सभी सड़क दुर्घटना पीड़ितों का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करने तथा योजना के प्रति संवेदनशील रहने की अपील की। यह बातें स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने बुधवार को अधिवेशन भवन, पटना में राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि चूंकि सड़क दुर्घटनाएं प्रायः सड़कों और राजमार्गों के किनारे होती हैं, इसलिए आम लोगों को आसपास उपलब्ध पीएम राहत से संबद्ध अस्पतालों की जानकारी आसानी से मिलनी चाहिए। साथ ही, पीएम राहत से संबद्ध अस्पतालों की जानकारी गूगल मैप पर उपलब्ध हो। दरअसल सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को त्वरित एवं बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा पीएम राहत योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। योजना के प्रावधानों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सभी स्टेक होल्डरर्स यथा आयुष्मान भारत से इम्पैनल्ड अस्पताल, पटना जिला के थानों के थाना प्रभारी, यातायात पुलिस पदाधिकारी, थाना प्रभारी, डॉयल 112 के पदाधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी तथा परिवहन विभाग के पदाधिकारियों को विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान योजना के प्रावधानों, दुर्घटना पीड़ितों के पंजीकरण, सत्यापन, उपचार एवं क्लेम की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। इससे पहले कार्यशाला का उदघाटन पुलिस महानिदेशक, संचार एवं तकनीकी सेवाएं अमित लोढ़ा, परिवहन सचिव राज कुमार, राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसन ने किया।
परिवहन सचिव राज कुमार ने कहा कि पीएम राहत योजना सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। योजना का लाभ जरूरतमंद पीड़ितों तक बिना किसी अनावश्यक विलंब के पहुंचे, इसके लिए परिवहन, स्वास्थ्य एवं पुलिस विभाग के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। सभी संबंधित पदाधिकारी योजना के प्रावधानों एवं निर्धारित प्रक्रिया की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाएं तथा इसके क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों एवं अस्पतालों से पंजीकरण, सत्यापन और उपचार की प्रक्रिया को सुगम बनाने तथा योजना के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि योजना का व्यापक प्रचार प्रसार हेतु सभी अस्पतालों में पीएम राहत योजना का बोर्ड लगाया जायेगा, जिसमें योजना के बारे में प्रदर्शित की जायेगी तथा हाईवे के किनारे योजना के व्यापक प्रचार के लिए होर्डिंग का अधिष्ठापन किया जायेगा।
कार्यशाला में राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसन ने पीएम राहत योजना के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल पात्र पीड़ितों को अधिकतम सात दिनों तक 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य दुर्घटना के बाद शुरुआती महत्वपूर्ण समय में घायल व्यक्ति को बिना किसी आर्थिक बाधा के आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
कार्यशाला में ERSS (डायल-112) की भूमिका एवं जिम्मेदारियों पर पुलिस उप महानिरीक्षक रामा शंकर राय द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसके साथ ही राजीव कुमार, रोड सेफ्टी द्वारा Tms 2.0 पोर्टल के माध्यम से दुर्घटना पीड़ितों के पंजीकरण की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। पुलिस सत्यापन, iRad/eDar प्रणाली तथा इस पूरी प्रक्रिया में पुलिस विभाग की भूमिका पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों की जिम्मेदारियों, कैशलेस उपचार तथा क्लेम प्रक्रिया के संबंध में प्रस्तुतीकरण दिया गया। इस दौरान पंजीकरण, सत्यापन एवं उपचार से संबंधित व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए सभी संबंधित हितधारकों के बीच विचार-विमर्श भी हुआ। इस मौके पर अपर पुलिस महानिदेशक, संचार एवं तकनीकी सेवाएं अमित लोढ़ा, स्वास्थ्य विभाग सचिव कुमार रवि, डीआईजी, यातायात सुशांत सरोज, अपर सचिव, परिवहन विभाग प्रवीण कुमार यातायात पुलिस, पटना, सागर कुमार इत्यादि उपस्थित थे।