जिला उपभोक्ता आयोग का निर्णय, बिल्डर और बीमा कंपनी को दिया ये आदेश

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना ने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए दो महत्वपूर्ण मामलों में निर्णय सुनाए हैं।

पटना: जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना ने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए दो महत्वपूर्ण मामलों में निर्णय सुनाए हैं। एक मामले में फ्लैट में बिक्री समझौते के अनुसार सुविधाएँ उपलब्ध नहीं कराने पर बिल्डर को 11.25 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है। वहीं, दूसरे मामले में वाहन दुर्घटना के बाद बीमा दावा अनुचित तरीके से खारिज किए जाने पर बीमा कंपनी को मरम्मत खर्च, ब्याज, मानसिक उत्पीड़न के लिए मुआवजा तथा मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया गया है।

उपभोक्ता शिकायत संख्या 39/2017 में शिकायतकर्ता सजल कुमार शर्मा बनाम आरडी इको डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य के मामले में आयोग ने आठ अक्टूबर 2026 को निर्णय सुनाया। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि फ्लैट का कब्जा दिए जाने के बावजूद बिक्री समझौते में उल्लिखित लिफ्ट, जनरेटर, अग्निशमन उपकरण तथा अतिरिक्त विद्युत बिंदु जैसी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं कराई गईं। शिकायतकर्ता को इन सुविधाओं की व्यवस्था अपने खर्च पर करनी पड़ी।

आयोग ने मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और बिक्री समझौते के आधार पर शिकायत को स्वीकार करते हुए विपक्षी पक्षों को निर्देश दिया कि वे शिकायतकर्ता को 10 लाख रुपये मुआवजे के रूप में, मानसिक पीड़ा एवं शारीरिक उत्पीड़न के लिए एक लाख रुपये तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 25 हजार रुपये का भुगतान करें। इस प्रकार कुल 11.25 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया है। आदेश के अनुसार, इसकी प्रति प्राप्त होने की तिथि से 120 दिनों के भीतर अनुपालन करना होगा। निर्धारित अवधि में अनुपालन नहीं होने पर इसके बाद 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा।

वहीं दूसरे मामले में उपभोक्ता शिकायत संख्या 320/2019, श्रीमती जूही कुमारी बनाम रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में आयोग ने 29 सितंबर 2026 को निर्णय सुनाया। शिकायतकर्ता की महिंद्रा स्कॉर्पियो एस6 प्लस वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसकी मरम्मत पर 85,092 रुपये खर्च हुए। शिकायतकर्ता ने बीमा कंपनी के समक्ष दावा प्रस्तुत किया, लेकिन कंपनी ने नो क्लेम बोनस (NCB) से संबंधित कथित गलत जानकारी का हवाला देते हुए 31 मई 2019 को दावा खारिज कर दिया था।

मामले में उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आयोग ने बीमा दावा खारिज करने के आधार को अस्वीकार्य माना। आयोग ने भारतीय मोटर टैरिफ के प्रावधान जीआर-27 का उल्लेख करते हुए कहा कि नए बीमाकर्ता द्वारा नो क्लेम बोनस दिए जाने की स्थिति में पूर्व बीमाकर्ता से निर्धारित 21 दिनों के भीतर उसका सत्यापन किया जाना चाहिए। इस मामले में निर्धारित अवधि में सत्यापन नहीं किया गया था। आयोग ने बीमा कंपनी के दावा अस्वीकृति संबंधी पत्र को निरस्त करते हुए शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार किया और कंपनी को वाहन की मरम्मत के लिए 85,092 रुपये, 31 मई 2019 से वास्तविक भुगतान तक 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक पीड़ा एवं उत्पीड़न के लिए 20 हजार रुपये तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने का निर्देश दिया। आदेश का अनुपालन आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से 60 दिनों के भीतर करना होगा।

दोनों निर्णय उपभोक्ताओं को उनके वैध अधिकारों के संरक्षण तथा सेवा में कमी की स्थिति में उचित राहत उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। इन मामलों में आयोग ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं के साथ किए गए समझौतों और सेवा संबंधी दायित्वों का पालन किया जाना आवश्यक है तथा अनुचित तरीके से दायित्वों से बचने पर संबंधित पक्षों को मुआवजा और अन्य देय राशि का भुगतान करना पड़ सकता है। ये महत्वपूर्ण आदेश जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्र एवं सदस्य रजनीश कुमार द्वारा पारित किए गए।