पटना- हुनर और ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहन एवं बड़ा बाजार उपलब्ध कराते हुए बिहार सरस मेला के वर्तमान वित्तीय वर्ष के प्रथम संस्करण का मंगलवार की शाम 29 सितंबर 26 को ज्ञान भवन, पटना में शानदार समापन हो गया। इस संस्करण ने अपने पूर्व के सभी रिकॉर्ड को तोड़ते हुए खरीद-बिक्री एवं आगंतुकों की संख्या में ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की है। पिछले वर्ष के प्रथम संस्करण में दस दिनों में लगभग 3 करोड़ 68 लाख रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई थी। इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 3 करोड़ 83 लाख रुपये से अधिक का रहा। दस दिनों में साढ़े तीन लाख से अधिक लोगों ने मेले का भ्रमण किया और जमकर खरीददारी की। समापन के दिन में भी बड़ी संख्या में लोग आये और खरीददारी की।
इस बार 15 राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला उद्यमियों ने बिक्री स्वाद और हुनर को ज्ञान भवन, पटना में प्रदर्शित किया एवं बिक्री की। सबसे ज्यादा बिक्री राजस्थान के स्टॉल से किचन आइटम की सबसे उत्तर प्रदेश के स्टॉल से बेडशीट और परिधान, कश्मीर के स्टॉल से ड्राई फ्रूट्स , बिहार से दीदी की रसोई के देशी व्यंजन, भागलपुर के स्टॉल से खादी और टेरीकॉट के परिधान, अरवल के स्टॉल से सजावट और खेल के उत्पाद, कैमूर जिला के स्टॉल से कालीन, रग्स और रनर, सहरसा के स्टॉल से मखाना, किशनगंज के स्टॉल से ,महानंदा चाय और मसाला, बांका के स्टॉल से,चूड़ा, गुड़ और कई प्रकार के मिलेट्स के आटे की खूब बिक्री हुई।
इसके साथ ही अन्य सभी स्टॉल पर बिक रहे उत्पाद आकर्षण के खास केंद्र रहे और उनकी भी जमकर बिक्री हुई। मेले में बिक रहे शुद्ध, पौष्टिक एवं स्वादिष्ट व्यंजन तथा हस्तशिल्प ने आगंतुकों को खूब लुभाया। आगंतुकों के साथ ही स्टॉल धारक भी एक-दूसरे के शिल्प, संस्कृति, लोककला, परंपरा और स्वाद से रूबरू हुए। सदियों पुरानी शिल्प को बड़ा बाज़ार मिला और आधुनिकता के इस दौर में उन्हें नया जीवन और सम्मान मिला।
बिहार के सभी जिलों की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी और जीविका के प्रोत्साहन से कुशल उद्यमी के तौर पर पहचान बनाने वाली जीविका दीदियां अपने-अपने क्षेत्र के शिल्प, कला और मशहूर देशी व्यंजनों को लेकर उपस्थित हुईं। हर उम्र और हर वर्ग के लोगों ने सरस मेला के आयोजन की सराहना की।
कश्मीर की महबूबा मलिक ने समस्तीपुर की किरण दीदी से बांस शिल्प सीखा तो सारण की रीता देवी की सुजनी-काथा कुर्तियों ने गोवा तक के उद्यमियों को आकर्षित किया। यह मेला सही मायने में एक भारत-श्रेष्ठ भारत का प्रतीक बना। मेले की एक और बड़ी सफलता इसका डिजिटल होना रहा। सभी 135 स्टॉल से डिजिटल खरीददारी होती रही।
ज्ञान भवन परिसर में लगे ग्राहक सेवा केंद्र पर रुपये की जमा-निकासी जमकर हुई। स्वास्थ्य एवं सहायता केंद्र ने आगंतुकों एवं स्टॉल धारकों को निरंतर सहयोग प्रदान किया। सीसीटीवी निगरानी, स्वच्छता और सुरक्षा की सभी ने सराहना की।दर्शकों ने कहा कि सरस मेला केवल भारतीय संस्कृति को प्रदर्शित करता हुआ मेला तो है ही मेला बल्कि सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं की सफलता की बानगी भी पेश करता रहा।
मेला सतत जीविकोपार्जन योजना और मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना जैसी कई योजनाओं की सफलता की जीवंत तस्वीर है। सरस मेला का द्वितीय संस्करण 14 से 28 दिसंबर 2026 तक गांधी मैदान, पटना में और भी बड़े स्वरूप में आयोजित करने हेतु प्रस्तावित है।