इधर बाढ़ उधर सुखाड़, 12 करोड़ का बियर बना 25 गांव के लिए मुसीबत

नालंदा में एक तरफ किसान उफनती नदियों के पानी से अपनी फसल बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ रहुई प्रखंड में सरकारी लापरवाही के कारण धान की फसल पानी के अभाव में सूखने की कगार पर है।

नालंदा में एक तरफ किसान उफनती नदियों के पानी से अपनी फसल बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ रहुई प्रखंड में सरकारी लापरवाही के कारण धान की फसल पानी के अभाव में सूखने की कगार पर है। जिसके कारण रहुई प्रखंड में सरकारी लापरवाही का खामियाजा हजारों किसानों को भुगतना पड़ रहा है। 

पंचाने नदी में उफान के बाद बिहारशरीफ समेत आसपास के इलाकों का कचरा अंबा पंचायत में पंचाने नदी पर 12 करोड़ की लागत से बने बियर पर जमा हो गया, जिससे नदी का पानी पइन और पोखरों तक नहीं पहुंच पा रहा है। करीब 25 गांवों के किसानों के सामने धान की फसल के पटवन का संकट खड़ा हो गया है।

किसानों की शिकायत पर मुखिया सुशीला देवी ने ग्रामीणों के सहयोग से मजदूर लगाकर बियर की सफाई कराई। ग्रामीणों का आरोप है कि सिंचाई विभाग की अनदेखी के कारण हर साल यही समस्या होती है। करोड़ों की लागत से बना बियर रखरखाव के अभाव में किसानों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस बियर पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, उसकी नियमित सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? ग्रामीणों का आरोप है कि सिंचाई विभाग की अनदेखी के कारण हर साल यही समस्या सामने आती है। करोड़ों की योजना किसानों के लिए वरदान बनने के बजाय कचरे के ढेर में फंसती नजर आ रही है।

नालंदा से मिथुन कुमार की रिपोर्ट