चर्चित विजय सहनी हत्याकांड में कोर्ट का बड़ा फैसला, मुख्य अभियुक्त अशोक यादव को उम्रकैद की सजा

बड़ी ख़बर बगहा से आ रही है, जहां रामनगर के चर्चित विजय सहनी हत्याकांड में अदालत ने शुक्रवार को दोषसिद्ध मुख्य अभियुक्त अशोक यादव को उम्र कैद की सजा सुनाई। अदालत ने जेल में बिताई गई अवधि को सजा की अवधि में समायोजित करने का आदेश दिया है।

बड़ी ख़बर बगहा से आ रही है, जहां रामनगर के चर्चित विजय सहनी हत्याकांड में अदालत ने शुक्रवार को दोषसिद्ध मुख्य अभियुक्त अशोक यादव को उम्र कैद की सजा सुनाई। जिला अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने अशोक यादव को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड समेत धारा 201 के तहत सात वर्ष सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा का एलान किया। अर्थदंड का भुगतान नहीं करने पर दोनों धाराओं में अलग-अलग छह माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। अदालत ने जेल में बिताई गई अवधि को सजा की अवधि में समायोजित करने का आदेश दिया है।

दरअसल पूरा मामला रामनगर थाना कांड संख्या 189/2022 से जुड़ा है। घटना एक मई 2022 की है। ज़ब मृतक विजय सहनी की पत्नी आशा देवी ने चार मई को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अभियोजन के मुताबिक विजय सहनी को पोखरा विवाद सुलझाने के बहाने फोन कर बुलाया गया। वह बाइक से घर से निकले लेकिन वापस घर नहीं लौटे। लिहाजा परिजनों ने काफी तलाश के बाद पुलिस को सूचना दी।

बताया जा रहा है की साज़िशन हत्या की इस घटना के करीब सात दिन बाद आरोपी महफूज अंसारी और तेतर राम की निशानदेही पर गोवर्धना जंगल में एक गड्ढे से विजय सहनी का शव बरामद किया गया। शव की पहचान अंगूठी और घड़ी से की गईं । जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।

एपीपी जीतेन्द्र भारती के मुताबिक अभियोजन पक्ष ने 10 गवाहों को कोर्ट में पेश किया। इनमें मृतक की पत्नी आशा देवी, बेटे राहुल कुमार सहनी, चिकित्सक डॉ. विनय कुमार और अनुसंधानकर्ता संतोष कुमार जायसवाल प्रमुख थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट, कॉल डिटेल, मोबाइल और बाइक समेत अन्य साक्ष्यों को भी अदालत के समक्ष रखा गया। यही वज़ह है की आज कोर्ट ने अपना अहम फ़ैसला सुनाते हुए सम्पति की लालच में कलयुगी बहन द्वारा प्रेमी संग साज़िश क़र भाई की निर्मम हत्या मामले में आजीवन कारावास औऱ एक लाख जुर्माना देने का आदेश पारित किया है।

बता दें की विगत 5 सितंबर को इसी मामले में हत्या कांड में शामिल महफूज अंसारी, राजकिशोर महतो, तेतर राम उर्फ साधु, श्री मुशहर और गीता देवी को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। 

एपीपी जितेंद्र भारती नें बताया की संपत्ति की लालच में गीता देवी ने अपने भाई विजय सहनी के हत्या की साजिश रची थी लिहाजा न्यायालय का फ़ैसला वैसे अपराधियों के लिए सबक होगा जो लोग क़ानून कों हाथ में लेकर किसी घटना कों अंजाम देते हैं।

बगहा से परवेज आलम की रिपोर्ट